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Judaai ki ghadi ho jaise

ग़ज़ल: ऐसे चुप हैं कि ये मंज़िल भी कड़ी हो जैसे। तेरा मिलना भी जुदाई कि घड़ी हो जैसे।। अपने ही साये से हर गाम लरज़ जाता हूँ।। रास्ते में कोई दीवार खड़ी हो जैसे।। मंज़िलें दूर भ...

Tumhe ab bhulna chahta hu

गीत: तुम्हें अब भूल जाना चाहता हूं ... लग रहा है साथ अपना इस जनम संभव न होगा, इसलिए मैं खुद तुम्हें अब भूल जाना चाहता हूं। हो सके तो माफ़ करना, पीर तुमको दे रहा हूं। तय हुआ था खिलखिल...

Saanso ko jeene ka sahara mil gaya

गीत: फ़िल्म ज़िद से... संगीत: शारिब-तोशी रचनाकार: शकील आज़मी गायक: अरिजीत सिंह साँसों को जीने का इशारा मिल गया। डूबा मैं तुझमें तो किनारा मिल गया।। साँसों को जीने का इशारा मिल गया...

Liyaqat Ali Asim, Qarachi

ग़ज़ल: 1 कहीं ऐसा न हो दामन जला लो। हमारे आँसुओं पर ख़ाक डालो।। मनाना ही ज़रूरी है तो फिर तुम, हमें सब से ख़फ़ा हो कर मना लो।। बहुत रोई हुई लगती हैं आँखें, मिरी ख़ातिर ज़रा काजल लगा...

Gopal das neeraj

:ग़ज़ल: :गोपाल दास नीरज: अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए। जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।। जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर, फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए।। आग बहत...

Ishrat shahjahanpuri

:ग़ज़ल: इशरत शाहजहाँपुरी: रंग चेहरे पर जो उभरा था वो गहराने लगा। आप को मतलब मुहब्बत का समझ आने लगा।। नाम जिसका पत्थरों पर लिख के तैराया गया, आज उसके नाम से इंसान घबराने लगा।। अप...

John elia

:ग़ज़ल: जॉन एलिया उसके पहलू से लग के चलते हैं। हम कहाँ टालने से टलते हैं।। मैं उसी तरह तो बहलता हूँ यारों और जिस तरह बहलते हैं।। क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में, जो भी खुश है हम उसस...

Legend of hindi poetry the 'Santosh Anand'

||Song of millennium : Ek Pyar Ka Nagma...|| इक प्यार का नग़मा है, मौज़ों की रवानी है। ज़िन्दगी और कुछ भी नही,तेरी मेरी कहानी है।। कुछ पा कर खोना है, कुछ खो कर पाना है। जीवन का मतलब तो ,आना और जाना है।। दो पल के जीवन ...

Gumnam and ishrat

:ग़ज़ल: :इशरत शाहजहाँपुरी: साँस की रफ़्तार भी पकड़े रहे। हम दिले बीमार भी पकड़े रहे।। रक़्स भी करते रहे बाज़ार में, दामन-ए-किरदार भी पकड़े रहे।। आसमानों पर नज़र अपनी रही, हाथ से ...

Ansar qumabri

: मुक़्तक : तू मान या न मान घड़ी दो घड़ी का है। ये जिस्म का मकान घड़ी दो घड़ी का है।। दो चार मिले हैं इन्हें प्रेम से जियो, ये हिन्दू मुसलमान घड़ी दो घड़ी का है।। :ग़ज़ल: 1: तू अगर बेवफ़ा नहीं हो...

Vyanjana pandey at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: पागल था या दीवाना था... शायद वो पागल था या दीवाना था। दिल की बातों से वो तो बेगाना था।। इश्क करेगा,  तौबा-तौबा ज़िद उसकी, बिन खोये ही उसको सब कुछ पाना था।। चौखट दिल की पार नहीं...

Shivam Sharma gumnam at hirdu kavyashala

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शिवम् शर्मा गुमनाम संस्थापक  ग़ज़ल: और आख़िर में ख़ुदकुशी कर ली... हम ने जिस दिन से आशिक़ी कर ली। बद से बदहाल ज़िंदगी कर ली। पहले इज़हार ए इश्क़ हमने किया, और आख़िर में ख़ुदकुशी कर ली।। मिन्नतें की न हमनें सूरज से, ख़ुद जले और रौशनी कर ली।। दोस्तों से सबक लिया हमने, दुश्मनों से ही दोस्ती कर ली। हम थे गुमनाम दिलजले शायर, अपने अश्क़ों से शाइरी कर ली।। ग़ज़ल: शायरी बेमिसाल देता है... जब वो उसका ख़्याल देता है। शायरी बेमिसाल देता है।। उसकी ज़ुल्फ़ें और आँख का काजल, जान मुश्किल में डाल देता है।। जीत मेरी है उसकी मुट्ठी में, बस वो सिक्का उछाल देता है।। है नहीं जो मेरे मुक़द्दर में, फिर क्यूँ उसका मलाल देता है।। शेर गुमनाम जब सुनाता है, तो कलेजा निकाल देता है।। - शिवम् शर्मा गुमनाम हिर्दू से जुड़ें: शिवम् शर्मा गुमनाम, संस्थापक एवं सचिव रश्मि द्विवेदी, अध्यक्षा वैभव पालीवाल, उपाध्यक्ष संपर्क सूत्र: 7080786182, 9889697675

Shakeel aazmi at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: शक़ील आज़मी बात से बात की गहराई चली जाती है। झूठ आ जाए तो सच्चाई चली जाती है।। रात भर जागते रहने का अमल ठीक नहीं, चाँद के इश्क़ में बीनाई चली जाती है।। मैं ने इस शहर को देखा भी ...

gaurav trivedi at hirdu kavyashala

ग़ज़ल:  रूह का क्या होता है??? जिस्म मरता है तो फिर रूह का क्या होता है । मौत ही सच है तो फिर मुझको बता सच क्या है । । वो मुझे छोड़ के दुनिया का हुआ जाता है । जिसको मैने ही सिखाया था मुहब्बत क्या है । । मेरी ग़ज़लों को इकट्ठा तो करो फिर देखो । कैसे अशआर की सूरत में ढला चेहरा है । । पहले सुख - दुख कई महसूस हुआ करते थे । मुझपे अब जो भी गुज़रता है गुज़र जाता है । । प्यार कर पाऊँ मैं अब ऐसा नहीं हो पाउँगा । चाहता तो हूँ मगर तेरा नहीं हो पाउँगा । । ग़ज़ल:  अब मैं ख़ुद भी चाहूँ तो वैसा नहीं हो पाउँगा... मुझसा दुनिया में तलाशे फिर रही हो तो सुनो । अब मैं ख़ुद भी चाहूँ तो वैसा नहीं हो पाउँगा । । कूज़ागर मुझको बनाते वक्त इतना ध्यान रख । मैं बिना मेहबूब के पूरा नहीं हो पाउँगा । । बाद माँ के भी मैं प्यारा तो हूँ लाखों का मगर । अब किसी की आँख का तारा नही हो पाउँगा । । उसने जब छोड़ा था मेरी उम्र थी इक्किस बरस । तबसे इक्किस का ही हूँ बुड्ढा नही हो पाउँगा । । -    गौरव  त्रिवेदी हिर्दू से जुड़ें: शिवम् शर्मा गुमनाम,  संस्थापक एवं सचिव रश्मि द्विवेदी,  अध...

Aslem Rashid at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: बड़ा ख़सारा हुआ... उसको छूकर बड़ा ख़सारा हुआ। लौट आया मैं ख़ुद में हारा हुआ।। ख़ाक में मिल के लोग ख़ाक हुऐ, ख़ाक को मल के मैं सितारा हुआ।। उसके होकर भी कब हुए उसके, जिस्म पहने रहे उता...

Krishna kumar naz at hirdu kavyashala

गीत: मैं तुम्हारा हूँ... हो कठिन, चाहे सरल हो ज़िंदगानी का सफ़र। मैं तुम्हारा हूँ, तुम्हारा ही रहूंगा उम्रभर।। अब विवशताएं न ज़ंजीरें बनेंगी पांव की। अब न होगी रोशनी फीकी हृदय के...

ENGLISH POETRY

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ENGLISH POEMS... Poem : Rashmi Dwivedi yaa... once again i need you to hold me tight yaa once again i want me to to feel alright yaa... once again i want to  love you like insane yaa... once angain i want  to feel the same yaa... just for once... just... just for once... Poem: Pratibha Sharma Why everything is so soulful, Why the world looks so beautiful. Am I not the same, Or rest of the world has changed. Why flowers smile at me, Why wind cuddles with me. Why the atmosphere is so harmonious, Why I am not that conscious. Why I am not worrying about the future, Why we are lost together. Why everything is beneath and I am above, Am I falling in love.... Poem: Shivam Sharma Gumnam You The one Who is the reason of my existence Your alcoholic eyes Pour lots of courage in me To face all difficulties Your rosy lips Fill color in my life Your glowing face Lights up my life   You are the ...

Ansar Qumbari at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: अब यही ज़िंदगी है तो हम क्या करें... अपने दामन को अब और नम क्या करें।। छोड़िये बीती बातों का ग़म क्या करें।। इसलिए हमने उनका यकीं कर लिया, खा रहे थे क़सम पर क़सम क्या करें।। ये तो ...