Hameed kanpuri at hirdu kavyashala
ग़ज़ल: कुछ मुहब्बत वफा की निशानी तो है। उसके चेहरे पे अब शादमानी तो है। तीरगी सब जहां की मिटानी तो है। रौशनी से धरा जगमगानी तो है। आबरू शायरी की बचानी त...
''हिर्दू कव्यशाला'' हिंदी - उर्दू के प्रचार - प्रसार के लिए गठित एक अ-व्यावसायिक संस्था है जिसके संरक्षक मशहूर शायर डा. अंसार क़म्बरी और प्रसिद्द कवि डा. कमलेश द्विवेदी हैं संस्था के संस्थापक युवा शायर शिवम् शर्मा गुमनाम एवं अध्यक्षा रश्मि द्विवेदी हैं...