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Suddhant deekshit at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: चाह कर अब हो नहीं पाउँगा मिर्ची की तरह। घेर रक्खा है मुझे दुनिया ने चींटी की तरह।। घूरती और नोंचती रहती है मुझको हर निगाह, बन गया हूँ मैं हक़ीक़त कह के लड़की की तरह।। जिस्म त...

Shivam sharma gumnam at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: ये गुज़रा वक़्त भी गुज़रा नहीं था। ये एसा था कभी सोचा नहीं था।। तुम्हारी याद थी जो साथ मेरे, मैं तन्हा हो के भी तन्हा नहीं था।। तुम आए हो तो अब महकेगा गुलशन, नहीं थे तुम तो ये म...

Gaurav trivedi at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: साँसें चलती हैं पर ज़िंदा थोड़ी हूँ। ख़ुश दिखता हूँ मै ख़ुश रहता थोड़ी हूँ।। मुझको जी कर भूल गई इतनी जल्दी? पगली मै इंसान हूँ लम्हा थोड़ी हूँ।। याद रखेगी जानाँ तुमको ये ...

Hameed kanpuri at hirdu kavyashala

ग़ज़ल: कुछ मुहब्बत वफा की निशानी तो है। उसके  चेहरे  पे अब  शादमानी तो है। तीरगी  सब जहां  की  मिटानी  तो  है। रौशनी   से   धरा   जगमगानी  तो  है। आबरू   शायरी  की  बचानी  त...

hindi diwas special

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं... सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा… हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा।। ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में। समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा।। सारे... परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का। वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा।। सारे... गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ। गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा।। सारे... ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको। उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा।। सारे... मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना। हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा।। सारे... यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से। अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा।। सारे... कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।। सारे... 'इक़बाल' कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में। मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा।। सारे... - मोहम्मद इक़बाल हिन्दी साहित्य का इतिहास : हिन्दी साहित्य का इतिहास  अत्यंत विस्तृत व प्राचीन है।   यह कहना ही ठीक होगा कि वैदिक भाषा ही...

Ekadashi tripathi at hirdu kavyashala

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आज आप के बीच हैं युवा कवयित्री कु. एकादशी त्रिपाठी जी... आज पढ़ते हैं एकादशी जी की एक बेहद मार्मिक कविता "हाँ! मैं कोठे वाली हूँ"... हर सिक्के के दो पहलूँ होते हैं... आज हम समझने की कोशिश करते हैं नारी के इस रूप को भी... जिसे समाज कभी अच्छी निगाहों से नहीं देखता... एकादशी त्रिपाठी हाँ! मैं कोठे वाली हूँ... अरे हाँ! मैं कोठे वाली हूँ... दिन-रात खुद का जिस्म बेचकर बेबाप औलादों को पालने वाली हूँ... नाजायज हूं दुनिया के लिए हराम के बच्चों वाली कहलाती है हाँ! मैं कोठे वाली हूँ... अपने होठों को मांस सा रंगाती हूँ आँखों में बेशर्मी भर सुरमा मैं लगाती हूँ हर रात रईसों के खातिर बिस्तर मैं सजाती हूँ सुबह तक रईसों का एक एक रुपया चुकता कराती हूँ पहले कोठे वाली नहीं थी पर हां अब कोठेवाली कहलाती हूँ सात अाठ वर्ष की कुल थी मैं उसका कातिल रात का जाना पहचाना चेहरा मुझसे कुछ भी लिपट रहा था मासूम थी ...नादान थी... बलात्कार हो रहा है मेरा इस सच से अनजान थी चीख रही थी ...चिल्ला रही थी ... दुनिया सारी तमाशाबीन बन मजाक उड़ा रही थी बोटी बोटी नोच रहा था सीना मेरा खोज रहा था...

Hema anjuli at hirdu kavyashala

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आज मिलते हैं मायानगरी की उस सुविख्यात कवयित्री से जिसने न सिर्फ़ कविता बल्कि अभिनय के क्षेत्र में भी काफी यश अर्जित किया... हम बात कर रहें हैं देश की जानी मानी कवयित्री, बॉलीवुड/टी.वी. अभिनेत्री, मॉडल हेमा अंजुलि जी की... हेमा जी द्वारा की गईं कुछ फ़िल्में- 26/11, नागरिक, राम सिंह चार्ली, सचिन - अ बिलियन ड्रीम्स कुछ टी.वी. सीरियल - हम हैं न, क़िस्मत कनेक्शन, सी. आई. डी., उतरन, ससुराल सिमर का, दिया और बाती हम, इस प्यार को क्या नाम दूं, अफ़सर बिटिया, गुमराह, भागों वाली... कैडबरी, आई. पी. एल. और भी कई विज्ञापनों के ज़रिये टी. वी. की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखती हैं हेमा अंजुलि साहिबा... हेमा चंदानी अंजुलि कविता -लड़कियाँ सच में... दुनिया को बहुत हैरान करती हैं लड़कियाँ एक तो बिना बताये कोख में आ जाती हैं फिर चाहे लाख मारने की कोशिश करो फिर भी बच जातीं हैं लड़कियाँ... ठीक से खाने को ना दो फिर भी देह बढ़ती ही जाती है फटे पुराने कैसे भी कपड़े पहनाओ फिर भी सुन्दर दिखती हैं लड़कियाँ... गरीबों की तरह पढाओ फिर भी मेरिट में आ जातीं हैं लड़कियाँ लाख परायी कह दो फिर भी अपनापन दि...