abhishek audichya at hirdu

आज की मुलाक़ात शहीदनगरी शाहजहांपुर से आने वाले बहुचर्चित गीतकार श्री अभिषेक औदीच्य जी से... पेश है उनका सर्वाधिक लोकप्रिय गीत ... "सिय दुलारी''...



जो न देते त्याग रघुवर सिय दुलारी को,
कैसे करते सिद्ध लव कुश दुनिया सारी को।

इन रगों में रक्त रघुकुल का प्रवाहित है,
राम सा तो शौर्य भी इनमें समाहित है।
पावनी इस गंग सी पावन सिया है,
रक्त का परिचय तो लवकुश ने दिया है।
फूलते फलते अयोध्या राज में जो,
निष्कलंकित कैसे करते माँ पियारी को।... जो न देते...

कौन फिर बंदी बनाता अश्व को वन में,
कौन कर देता विवश ये सोचने मन में।
इतना साहस बांध लें हनुमान को भी,
व्यर्थ कर दे शेष के हर वान को भी।
चीख कर कहता पराक्रम सूर्यवंशी ये,
शीश नत कर न्याय दो तुम माँ हमारी को।... जो न देते...

मैं नही शंकित किसी संदर्भ में था,
मेरा ही लघु रूप तेरे गर्भ में था।
इस अभागे पर मुकुट का भार भी था,
जग कलंकित करने को तैयार भी था।
एक शिला हिय पर रखी ये सोचकर ,
फिर न सहना  ये पड़े किसी अन्य नारी को।... जो न देते...
- अभिषेक औदीच्य 

Comments

Popular posts from this blog

lakho sadme dhero gham by azm shakiri

Bahut khoobsurat ho tum by tahir faraz at hirdu

Agnivesh shukla at hirdu kavyashala