hemant pandey at hirdu
आज मिलते हैं सहित्यनगरी कानपुर की धरती से आने वाले देश के बेहद लाड़ले हास्य-व्यंग्यकार कवि श्री हेमंत पाण्डेय जी से... युवाओं चहेते कवि हेमंत पाण्डेय जी की एक ख़ूबसूरत सी कविता हिर्दू के तमाम पाठकों के लिए...
शीर्षक - भ्रूण हत्या के समर्थन में कविता...
शीर्षक - भ्रूण हत्या के समर्थन में कविता...
गुरु जी हमसे बोले बेटा भोले
अत्याचार पे लिखो भ्रस्टाचार पे लिखो
कब तक देश को यूहीं गुलाम लिखोगे
मल्लिका बिपासा इनपे कबतक कलाम लिखोगे
रोज रोज एक ही कविता सुनाता है
नई रचना क्यों नही लाता है
देश मे फैली हुई भ्रान्ति लिखो
लिखना है तो क्रांति लिखो
किसी स्टार पे लिख गायक पे लिख
मंत्री पे लिख विधायक पे लिख
हम बोले हम जानते है नेता किस लायक होते
अगर वो शरीफ होते तो क्या विधायक होते
वैसे एक घटना सबकी आंखों में दिखी है
हमने उसी पे कविता लिखी है
विषय है भ्रूण हत्या जरूरी।
गुरु जी बोले अब यही सब लिखेगा
तो मंचो पे पिटेगा
पूरा देश भ्रूण हत्या के विरोध में दिख रहा है।
और तू समर्थन में कविता लिख रहा है
हम बोले गुरु जी
तो क्या बेटियों को किसी पे भार होने दूँ
दरिंदों का खुलेआम शिकार होने दूं
आप चाहते है तंदूरों में ये गला दी जाएं
दहेज ना लायें तो जला दी जाएं
उस मां से पूछो
जो बेटियों की तोतली बोली सुनके झूम लेती है
स्कूल भेजते समय अपने कलेजे को चूम लेती है
क्या गुजरता होगा उस बेटी पे उसके सपने पूरे होने से पहले टूट जाते है
पूछो उस पिता से जिसकी बेटी की अस्मत भेड़िये लूट जाते है
तो सबके लिए बस एक ही सीख है
जब सरकार बेटियों को बचा नही सकती
तो भ्रूण में इनका मर जाना ही ठीक है
बुरा ना मानिये जो लिखा है सोंचा है जाँचा है।
सरकार के नारे पर एक कवी का तमाचा है।
- हेमन्त पांडेय
अत्याचार पे लिखो भ्रस्टाचार पे लिखो
कब तक देश को यूहीं गुलाम लिखोगे
मल्लिका बिपासा इनपे कबतक कलाम लिखोगे
रोज रोज एक ही कविता सुनाता है
नई रचना क्यों नही लाता है
देश मे फैली हुई भ्रान्ति लिखो
लिखना है तो क्रांति लिखो
किसी स्टार पे लिख गायक पे लिख
मंत्री पे लिख विधायक पे लिख
हम बोले हम जानते है नेता किस लायक होते
अगर वो शरीफ होते तो क्या विधायक होते
वैसे एक घटना सबकी आंखों में दिखी है
हमने उसी पे कविता लिखी है
विषय है भ्रूण हत्या जरूरी।
गुरु जी बोले अब यही सब लिखेगा
तो मंचो पे पिटेगा
पूरा देश भ्रूण हत्या के विरोध में दिख रहा है।
और तू समर्थन में कविता लिख रहा है
हम बोले गुरु जी
तो क्या बेटियों को किसी पे भार होने दूँ
दरिंदों का खुलेआम शिकार होने दूं
आप चाहते है तंदूरों में ये गला दी जाएं
दहेज ना लायें तो जला दी जाएं
उस मां से पूछो
जो बेटियों की तोतली बोली सुनके झूम लेती है
स्कूल भेजते समय अपने कलेजे को चूम लेती है
क्या गुजरता होगा उस बेटी पे उसके सपने पूरे होने से पहले टूट जाते है
पूछो उस पिता से जिसकी बेटी की अस्मत भेड़िये लूट जाते है
तो सबके लिए बस एक ही सीख है
जब सरकार बेटियों को बचा नही सकती
तो भ्रूण में इनका मर जाना ही ठीक है
बुरा ना मानिये जो लिखा है सोंचा है जाँचा है।
सरकार के नारे पर एक कवी का तमाचा है।
- हेमन्त पांडेय

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