shakeel aazmi at hirdu kavyashala
आज हम मिलते हैं उस
शायर से जिसने न जाने कितनी बॉलीवुड फिल्मों को ग़ज़लों – गीतों से नवाज़ा... जी हाँ
हम बात कर रहे हैं मशहूर शायर जनाब शकील आज़मी साहब की...
कुछ प्रमुख फ़िल्में जिनमें
शकील साहब ने अपने शब्द दिए...
तेरी फ़रियाद (तुम बिन – 2)
तेरी फ़रियाद (तुम बिन – 2)
एक हथेली (इश्क के
परिंदे)
साँसों को (ज़िद)
ज़िद (ज़िद)
मजबूर तू भी कहीं (1920
– ईविल रिटर्न)
अपना मुझे लगा तू (1920
– ईविल रिटर्न)
आओ चलें हम (तेज़ाब:द
एसिड ऑफ़ लव)
मैं हूँ साथ तेरे (शादी
में ज़रूर आना)
जाने जां (ज़हर)
ए! बेख़बर (ज़हर)
अली (नज़र)
ग़ज़ल – परों को खोल...
परों को खोल ज़माना उड़ान
देखता है।
ज़मीं पे बैठ के क्या
आसमान देखता है।।
मिला है हुस्न तो इस
हुस्न की हिफाज़त कर,
संभल के चल तुझे सारा
जहान देखता है।।
कनीज़ हो कोई या कोई
शाहज़ादी हो,
जो इश्क़ करता है कब
ख़ानदान देखता है।।
घटाएं उठती हैं बरसात
होने लगती है,
जब आँख भर के फ़लक को
किसान देखता है।।
यही वो शहर जो मेरे
लबों से बोलता था,
यही वो शहर जो मेरी
ज़बान देखता है।।
मैं जब मकान के बाहर
क़दम निकालता हूँ,
अजब निगाह से मुझको
किसान देखता है।।
- शकील आज़मी

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