alka mishra at hirdu kavyashala

आज साहित्यनगरी कानपुर की उस शायरा के हुज़ूर चलते हैं जो महज़ रद्दीफ़ - काफ़िये पर अपने शेर नहीं कहतीं बल्कि इंसानी जज़्बातों को बड़ी गहराई से छूते हुए अपनी ग़ज़ल को सजाती संवारती हैं... जी हाँ हम बात कर रहें हैं, ख़्वाहिश फ़ाउण्डेशन की संस्थापिका अलका मिश्रा की... अलका जी सुप्रसिद्ध शायरा होने के साथ - साथ जानी - मानी समाज सेविका भी हैं...दिव्यांगों, महिलाओं, अनाथों एवं अन्य ज़रूरतमंदो के लिए हमेशा पहली सफ़ में खड़ी दिखाई पड़ती हैं... आइये लुत्फ़ लेते हैं अलका जी की एक बेहद ख़ूबसूरत सी ग़ज़ल जिसमे आपने इश्क़-ए-मज़ाजी से लेकर इश्क़-ए-हक़ीक़ी तक का सफ़र बहुत ही ख़ूबसूरती से तय किया है...

 अलका मिश्रा 

तेरा ही आस्ताना चाहती हूँ
यहीं धूनी रमाना चाहती हूँ

है मेरी रूह इक गहरा समंदर
सो ख़ुद में डूब जाना चाहती हूँ

मेरी ख़ाना-बदोशी थक चुकी है
कहीं कोई ठिकाना चाहती हूँ

है तुझ से दूर जाने का ये मक़सद
तुझे नज़दीक लाना चाहती हूँ

जो हाथों से फ़िसलते जा रहे हैं
मैं वो लम्हे बचाना चाहती हूँ

नदी मैं हूँ तू मेरा है समंदर
बस अब तुझ में समाना चाहती हूँ

उजालों के लिए ख़ुद को जलाकर
उजालों में नहाना चाहती हूँ
- अलका मिश्रा


विशेष - उजास सोशल एंड कल्चरल सोसाइटी एक बार फिर लाएं हैं....
AURA AWARDS - 2018 
दिनांक - 17 - जून - 2018
स्थान - रागेंद्र स्वरुप ऑडिटोरियम, सिविल लाइन्स, कानपुर 


''हिर्दू काव्यशाला'' से जुड़ें... 
संतोष शाह (सह-संस्थापक)
शिवम् शर्मा गुमनाम (सह-संस्थापक)
रश्मि द्विवेदी (अध्यक्षा)
संपर्क सूत्र - 8896914889, 8299565686, 9889697675

Comments

  1. वाह बहुत खूब. सभी सदस्यों को दिल से बधाई. संस्था इसी तरह तरक्की करते हुए दिलों को जोड़ने में कामयाब हो इसी आशा के साथ....
    अल्का जी वाकई में बेहतरीन शायरा और एक नेक दिल इंसान हैं. सौभाग्य से उनसे रूबरू होने का अवसर हमें मिला है. उनकी रचनाओं की बानगी के हम प्रशंसक हैं. फिर कभी किसी मोड़ पर मिलने की ख्वाहिश के साथ....

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  2. हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया रमेश यादव जी यक़ीनन हम जल्दी ही मिलेंगे...

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  3. WAaaaa waaaaa बहुत खूबसूरत अशआर बधाई

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