anu goonj at hirdu kavyashala



आज की मुलाक़ात सवाईमाधोपुर, राजस्थान की उस युवा कवयित्री से जिसका हर शब्द स्वयं में कविता होने की काबिलियत रखता है और सुरों पर भी ख़ासा अधिकार है.... जी हाँ शायद आप सही पहचान रहे हैं हम बात कर रहें हैं अनामिका सिंह साहिबा की... काव्य जगत इन्हें "अनु गूँज" के नाम से जानता है... आपके समक्ष है अनु गूँज साहिबा की एक बेहद ख़ूबसूरत सी अतुकांत कविता...



तुम बार बार करते रहे प्रयत्न
मुझे लिखने का और
मैं हर बार मिटती गई
क्योंकि
तुम्हारे सारे प्रयत्न उतने ही कमजोर थे
जितना कमजोर था
तुम्हारा प्रेम।
तुमने कई बार मुझे लिखा
अरावली की पहाड़ियों से गिरते उन झरनों के पानी से
जो सावन के बाद तरसा देते हैं
एक बूँद पानी को भी।
फिर कभी तुमने रच दिया मुझे
जैसलमेर के
उन धोरों के बीच
जो तेज़ हवा के साथ ही बदल लेते हैं
अपना स्थान ।
तुम्हारे इन असफल प्रयासों को देखकर
दम तोड़ती रही
तुम्हारी प्रेमिल भावनाएं किसी अंतःवाहिनी घघ्घर की तरह।
और
जब तुम नहीं रच पाये मुझे
तो मैंने प्रवाहित करदी
राशमी के मातृकुंडिया में तुम्हारे मृत प्रेम की अस्थियां ।
और मैंने
स्वयं चयन किया अपने
रचनाकार का।
जिसके लेखन में उतना ही स्थायित्व है
और प्रेम उतना ही पवित्र
जितनी स्थायी और पवित्र है
गंगा !

- अनामिका"अनुगूँज"
सवाईमाधोपुर (राजस्थान)

हिर्दू काव्यशाला से जुड़ें - 
शिवम् शर्मा 'गुमनाम'
सह-संस्थापक 
संतोष शाह 
सह-संस्थापक
संपर्क सूत्र -9889697675, 8299565686


विशेष - उजास सोशल एंड कल्चरल सोसाइटी एक बार फिर लाएं हैं....
AURA AWARDS - 2018 
दिनांक - 18 - जून - 2018
स्थान - रागेंद्र स्वरुप ऑडिटोरियम, सिविल लाइन्स, कानपुर




Comments

Popular posts from this blog

lakho sadme dhero gham by azm shakiri

Bahut khoobsurat ho tum by tahir faraz at hirdu

Agnivesh shukla at hirdu kavyashala