bharat bhushan pant at hirdu kavyshala
आज सालगिरह है देश के मशहूर - ओ - मारूफ़ शायर जनाब भारत भूषण पंत साहब की... आज के दौर में असल शायरी की चलती - फिरती किताब हैं पंत साहब... हिर्दू की पूरी टीम की तरफ़ से तमाम शायरी - पसंद लोगों के पसंदीदा शायर भारत भूषन पंत साहब को ढ़ेर सारी मुबारक़बाद... पेश - ए - ख़िदमत है पंत साहब की एक ख़ूबसूरत सी ग़ज़ल...
आईने से पर्दा कर के देखा जाए ।
आईने से पर्दा कर के देखा जाए
ख़ुद को इतना तन्हा कर के देखा जाए ।।
हम भी तो देखें हम कितने सच्चे हैं,
ख़ुद से भी इक वअ'दा कर के देखा जाए ।।
दीवारों को छोटा करना मुश्किल है,
अपने क़द को ऊँचा कर के देखा जाए ।।
रातों में इक सूरज भी दिख जाएगा,
हर मंज़र को उल्टा कर के देखा जाए ।।
दरिया ने भी तरसाया है प्यासों को,
दरिया को भी प्यासा कर के देखा जाए ।।
अब आँखों से और न देखा जाएगा,
अब आँखों को अंधा कर के देखा जाए ।।
ये सपने तो बिल्कुल सच्चे लगते हैं,
इन सपनों को सच्चा कर के देखा जाए ।।
घर से निकल कर जाता हूँ मैं रोज़ कहाँ,
इक दिन अपना पीछा कर के देखा जाए ।।
- भारत भूषण पंत
हिर्दू काव्यशाला से जुड़ें...
शिवम् शर्मा गुमनाम (सह-संस्थापक)
संतोष शाह (सह-संस्थापक)
संपर्क सूत्र - 9889697675, 8299565686
सालगिरह की ढ़ेर सारी मुबारक़बाद दादा...
- टीम हिर्दू (रश्मि द्विवेदी, दीप्ति वर्मा, अगम शर्मा, अपर्णा गुप्ता, आराधना शुक्ला, यश दुबे,रश्मि मिश्रा, शिवम् अरोड़ा, वैभव पालीवाल, संतोष शाह,शिवम् शर्मा गुमनाम, झलक सक्सेना एवं अन्य)

लाजवाब ग़ज़ल : इक दिन अपना पीछा करके देखा जाए... वाह!!!
ReplyDeletewaah waah
ReplyDelete