parveen shakir at hirdu kavyshala

आज उर्दू अदब की उस बा – कमाल शायरा के रू-ब-रू होते हैं जिसने आप अपनी पूरी ज़िंदगी शायरी के नाम कर दी... हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान की मशहूर शायरा मोहतरमा परवीन शाकिर साहिबा की... पेश – ए – ख़िदमत हैं उनके चाहने वालों के नाम उनकी एक बेहद ख़ूबसूरत ग़ज़ल...
परवीन शाकिर
 ग़ज़ल:
जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे!
चाँद के हमराह हम हर शब सफ़र करते रहे!! 

रास्तों का इल्म था हम को न सम्तों की ख़बर,
शहर-ए-ना-मालूम की चाहत मगर करते रहे!!

हम ने ख़ुद से भी छुपाया और सारे शहर को,
तेरे जाने की ख़बर दीवार-ओ-दर करते रहे!!

वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी,
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे!! 

आज आया है हमें भी उन उड़ानों का ख़याल,
जिन को तेरे ज़ोम में बे-बाल-ओ-पर करते रहे!!
 - परवीन शाकिर

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