vandana verma at hirdu kavyashala
आज मिलते हैं मिर्जापुर से मोहब्बत की
शायरी करने वाली नामवर शायरा वंदना वर्मा साहिबा से... जिन्हें शायरी की दुनिया
वंदना अनम कहती है... पेश – ए – ख़िदमत है अनम साहिबा की ख़ूबसूरत सी ग़ज़ल –
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| वंदना वर्मा “अनम” |
ग़ज़ल -
कुछ और नहीं हैं ये बस तेरी निशानी है।
है खूने जिगर मेरा आँखो में जो पानी है।।
हर रोज़ ही लिखती हूँ मैं अपना ही
अफसाना,
पढ़ ले मेरी आँखों में बस तेरी कहानी है।।
जिस दिन से तुझे अपनी आँखों में बसाया
है,
कहती है मुझे दुनिया ये कोई दिवानी है।।
ये जान भले जाये ईमान भले जाये,
पर रस्म मोहब्बत की कैसे भी निभानी है।।
यादों पे तुम्हारी अब कोई जोर नहीं मेरा,
जीना है बहुत मुश्किल ये बात बतानी है।।
इस तेरी अनम को बस तुझसे ही मोहब्बत है,
कुर्बान तेरी ख़ातिर मेरी ये जवानी है।।
- वंदना
वर्मा “अनम”
दीप्ति वर्मा की
तस्वीर पर सुप्रसिद्ध कवयित्री डा. मधु प्रधान का ख़ूबसूरत सी कविता
शीर्षक - "मत उदास हो"
मत उदास हो थके मुसाफिर
कुछ श्रम-बिंदु
बिखर जाने से
यह पथ और सँवर जायेगा...
रोक सकी कब
पागल रजनी
आने वाली
सलज उषा को
बाँध न पाई काली बदली
उगते रवि की
विकल प्रभा को
अपराजित निशीथ
घट-घट कर
अभिनव पूनम को पायेगा...
कब विकास के
चरण रुके हैं
बीते युग की मनुहारों
से
सम्भव है आने वाला कल
कोई ज्योति शिखर
लायेगा...
सहमी नहीं नवेली
नदिया
कंकरीले पथ या खारों
से
गति पाई है
उठते-गिरते
ऊँचे पर्वत की धारों
से
बढ़ते जाना रे अंकुर
तू
हर दिन और सँवर
जायेगा...
- डॉ. मधु प्रधान
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ReplyDeleteयादों पे तुम्हारी अब कोई जोर नहीं मेरा,
जीना है बहुत मुश्किल ये बात बतानी है।।
इस शेर को दुबारा देखने की ज़रूरत है۔ मिस्राए उला (वज़न)मात्रा से बाहर हो रहा है , बाकी अशआर बेहतर हैं
आदरणीय हमारे ख़याल से मिसरे बहर में हैं...
Deleteयादों पे तुम्हारी अब कोई जोर नहीं मेरा,
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जीना है बहुत मुश्किल ये बात बतानी है।।
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- वंदना वर्मा “अनम”