sarvesh asthana at hirdu kavyashala
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| डा. सर्वेश अस्थाना |
स्माइल मैन डा. सर्वेश अस्थाना (अंतर्राष्ट्रीय हास्य
व्यंग्यकार, गीतकार एवं ग़ज़लकार)
ग़ज़ल: माँ
कितने दर्द उठाती है माँ।
फिर भी तो मुस्काती है माँ।।
अपनी माँ का प्यार समेटे,
खुद ही माँ हो जाती है माँ।।
दो दो कुल की उजियारी है,
कितने दीप जलाती है माँ।।
बच्चों को सब खाना देकर,
खुद की भूख मिटाती है माँ।।
रूप बदल सकते सब रिश्ते,
केवल माँ बन आती है माँ।।
ग़ज़ल: बाप
वो है एक बेचारा बाप।
बच्चों से ही हारा बाप।।
बच्चे लहरों का सैलाब,
टूटा हुआ किनारा बाप।।
उनके ही सम्मुख बेबस,
जिनका रहा सहारा बाप।।
औलादें अब सूरज हैं,
टूटा हुआ सितारा बाप।।
अब वो केवल नौकर है,
होगा कभी हमारा बाप।।
:डा. सर्वेश अस्थाना
(9415303060)
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