vedricha at hirdu kavyashala
वेदऋचा माथुर (बदायूं) आज मिलते हैं बदायूँ से हिंदी-उर्दू मिश्रित ग़ज़लों की जानी मानी शायरा कु. वेदऋचा माथुर साहिबा से... शाइरी में वेदऋचा अपना एक अलग लहज़ा रखती हैं जो उन्हें शायराओं की फेहरिस्त में एक अलग और ख़ास मुकाम देता है... मल्लिका – ए – तरन्नुम वेदऋचा की एक ख़ूबसूरत सी ग़ज़ल तमाम शायरीपसंद लोगो के लिए... ग़ज़ल - अभी मैं अमावस कहाँ हो गईं हूँ ... दुखों की अजब दास्ताँ हो गई हूँ । तुम्हारे लिए आसमाँ हो गई हूँ । । जहाँ सिर छुपाते हैं ग़म सारे आ के, मैं उजड़ा हुआ इक मकाँ हो गई हूँ । । न सोचों मुझे जब नहीं मिट सकूंगी, नया रंग बन कर रवाँ हो गई हूँ । । जिसे दर्द नें एक सौगात दी है, मैं वो खूबसूरत जहाँ हो गई हूँ । । कभी चाँदनी भी मेरा साथ देगी, अभी मैं अमावस कहाँ हो गई हूँ । । - वेदऋचा माथुर हिर्दू काव्यशाला से जुड़ने के लिए संपर्क करें - शिवम् शर्मा ''गुमनाम'' सह - संस्थापक एवं संतोष शाह सह - संस्थापक संपर्क सूत्र - 9889697675, 8299565686, 8896914889 ई-मेल- hirdukavyashala555@gmail.com