suryakant tripathi nirala at hirdu kavyshala
आज मिलते हैं छायावाद युग के स्तंभ कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी से... सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की कुछ प्रमुख कृतियाँ गीतिका, परिमल, अनामिका, कुकुरमुत्ता, अणिमा आदि हैं...आपके समक्ष है निराला जी की एक बहुचर्चित कविता... सूर्यकांत त्रिपाठी निराला कविता – दिवसावसान का समय- मेघमय आसमान से उतर रही है वह संध्या-सुन्दरी , परी सी , धीरे , धीरे , धीरे तिमिरांचल में चंचलता का नहीं कहीं आभास , मधुर-मधुर हैं दोनों उसके अधर , किंतु ज़रा गंभीर , नहीं है उसमें हास-विलास। हँसता है तो केवल तारा एक- गुँथा हुआ उन घुँघराले काले-काले बालों से , हृदय राज्य की रानी का वह करता है अभिषेक। अलसता की-सी लता , किंतु कोमलता की वह कली , सखी-नीरवता के कंधे पर डाले बाँह , छाँह सी अम्बर-पथ से चली। नहीं बजती उसके हाथ में कोई वीणा , नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप , नूपुरों में भी रुन-झुन रुन-झुन नहीं , सिर्फ़ एक अव्यक्त शब्द-सा ' चुप चुप चुप ' है गूँज रहा सब कहीं- व्योम मंडल में , जगतीतल में- सोती शान्त सरोवर पर उस अमल कमलिनी-दल में- सौंदर्य-गर्विता-सरिता के अति विस्तृ...